इसे क्यों लिखा?
इसे क्यों लिखा ? सवाल यह है कि इस उपन्यास 'परदेसी...जाना नहीं' को मैंने क्यों लिखा? मैं देख रहा हूं कि पहले गाँवों में पुराने घर खाली हो जाते थे, अब शहरों में भी खाली हो रहे हैं. बीसवीं सदी के मध्यकाल से, भारत में जब से ट्रेनों से आवागमन की सुविधा बढ़ी, गाँव से शहरों के लिए विस्थापन बढ़ा और व्यापार या रोजगार के लिए युवा अपना गाँव छोड़कर महानगरों, शहरों और अर्ध-नगरों में जाकर बसने लगे. यह उत्तर भारत में मारवाड़-राजस्थान, उत्तर प्रदेश और बिहार में और दक्षिण भारत में आंध्रप्रदेश, तमिलनाडु और केरल में बहुत बड़ी संख्या में हुआ. पहले युवा गए, बाद में 'अपने परिवार' को वहां बुला लिया, गाँव में बुढ़ापा रह गया. जब बूढ़े मर-खप गए तब उनके घरों के दरवाजों में ताले लटक गए. खेत वीरान हो गए और उन पर दूसरे लोगों ने बेजा कब्जा कर लिया. हरे-भरे खिलखिलाते गाँव सूखी उदासी लेकर अपने व्यतीत को याद करने लगे. बीसवीं सदी के अंतिम कालखंड में आम भारतीयों के मन में शिक्षा के क्षेत्र में व्यापक रुचि उत्पन्न हुई और शिक्षित नागरिकों ने अपने बच्चों को उच्च-शिक्षा के ...